अध्याय ३१ — द्रोणानीके तुमुलसंग्रामः
The Tumultuous Battle around Droṇa’s Formation
अनीकानां प्रभग्नानामवस्थानमपश्यताम् । दुष्करं प्रतिसंधानं तन्ममाचक्ष्व संजय,भागती हुई सेनाओंको जब अपने ठहरनेके लिये कोई स्थान नहीं दिखायी देता हो, उस समय उन सबको संगठित करके एक स्थानपर ले आना बड़ा कठिन काम होता है। अतः संजय! तुम मुझे वह सब समाचार ठीक-ठीक बताओ
«إذا كانت الجيوش المنهزمة تهرب ولا ترى موضعًا تقف فيه أو تستقر، فإن جمعها وإعادتها إلى مكان واحد أمرٌ عسير للغاية. فحدّثني يا سانجيا بكل تلك الأخبار حديثًا دقيقًا.»
संजय उवाच