महत् पूर्व स्थितो यच्च प्राणोत्पत्तिस्थितश्न यत् । स्थितलिडज्ञश्न यन्नित्यं तस्मात् स्थाणुरिति स्मृत:,वे पूर्वकालसे ही महान् रूपमें स्थित हैं, प्राणोंकी उत्पत्ति और स्थितिके कारण हैं तथा उनका लिंगमय शरीर सदा स्थिर रहता है; इसलिये उन्हें 'स्थाणु' कहते हैं
قال فياسا: «إنه قائمٌ في عظمته منذ الأزل؛ وهو سببُ نشأة الأنفاس الحيوية وبقائها؛ وجسدُه ذو طبيعة اللِّينغا ثابتٌ لا يتزعزع على الدوام. فلذلك يُذكَر باسم “سْثَانُو” (Sthāṇu)—الثابت الذي لا يتبدّل.»
व्यास उवाच