षष्ठमध्ययनं नाम तेषां कस्मिन् प्रतिष्ठित: । हतो द्रोणो मया होवं किं मां पार्थ विगर्हसे,धृष्टद्युम्न बोला--'अर्जुन! यज्ञ करना और कराना, वेदोंको पढ़ना और पढ़ाना तथा दान देना और प्रतिग्रह स्वीकार करना-ये छः कर्म ही ब्राह्मणोंके लिये मनीषी पुरुषोंमें प्रसिद्ध हैं। इनमेंसे किस कर्ममें टद्रोणाचार्य प्रतिष्ठित थे। अपने धर्मसे भ्रष्ट होकर उन्होंने क्षत्रिय-धर्मका आश्रय ले रखा था। पार्थ! ऐसी अवस्थामें यदि मैंने ट्रोणाचार्यका वध किया तो तुम इसके लिये मेरी निनदा क्यों करते हो। वह नीच कर्म करनेवाला ब्राह्मण दिव्यास्त्रोंद्रारा हमलोगोंका संहार करता था
dhṛṣṭadyumna uvāca | ṣaṣṭham adhyayanaṃ nāma teṣāṃ kasmin pratiṣṭhitaḥ | hato droṇo mayā hovaṃ kiṃ māṃ pārtha vigarhase ||
قال دْهْرِشْتَديومْنَ: «ومن بينها يُذكر ما يُسمّى “الانضباط السداسي”؛ فبأيّ واجبٍ منها كان درونا ثابتًا حقًّا؟ لقد قتلتُ درونا؛ فلمَ يا بارثا تَلومني؟ لقد انحرف عن دهرمته اللائقة ولاذ بطريق الكشاتريا؛ وهو على ذلك كان يُهلكنا بأسلحةٍ إلهية. ففي مثل هذه الحال، لِمَ يُدان قتلي له؟»
धष्टहुम्न उवाच