द्रोणपुत्रस्याग्नेयास्त्रप्रयोगः — अर्जुनस्य ब्राह्मास्त्रप्रतिघातः — व्यासोपदेशः
Aśvatthāmā’s Agneyāstra, Arjuna’s Brāhmāstra Counter, and Vyāsa’s Instruction
ते भिन्ना धन्विना तेन धृष्टट्युम्नं पुनर्मधे । विव्यधु: पञ्चभिस्तूर्णमेकैको रथिनां वर:,उन थधनुर्धर वीर धृष्टद्युम्नके बाणोंसे क्षत-विक्षत हो उन सभी योद्धाओंने युद्धस्थलमें पुनः उन्हें पाँच-पाँच बाणोंसे शीघ्र ही बींध डाला। प्रत्येक महारथीने उनपर प्रहार किया था
وقد مُزِّقوا بسِهامِ قوسِ دْهْرِشْتَدْيُومْنَة وأُثخِنوا جراحًا، فعاد أولئك المقاتلون إلى قلب الميدان، وسرعان ما طعنوه بخمسةِ سهامٍ لكلِّ واحد. وهكذا ضربه كلُّ فارسٍ من عِظامِ الرَّاثين.
संजय उवाच