Droṇavadha-saṃniveśaḥ — The Convergence Toward Droṇa’s Fall
Book 7, Chapter 164
सम्प्रदीपितसर्वाज्ञी सायकैस्तैर्महारथौ । अदृश्येतां रणे क्रुद्धावुल्काभिरिव कुज्जरी,उन दोनों महारथियोंके सारे अंग उन बाणोंसे उद्धासित हो रहे थे; इसीलिये वे दोनों, रणक्षेत्रमें उल्काओंसे प्रकाशित एवं क्रोधमें भरे हुए दो हाथियोंके समान दिखायी देते थे
كانت أعضاءُ هذين المَهارَثَين كلُّها تتلألأ بتلك السهام؛ ولذلك بدَوَا في ساحة القتال، وهما في غيظٍ عارم، كفيلين من الفيلة تُضيئهما شُهُبٌ ملتهبة.
संजय उवाच