Adhyāya 65: Dawn Assembly, Makara–Śyena Vyūhas, and Commander Engagements
संजय उवाच क्षयं मनुष्यदेहानां गजवाजिरथक्षयम् । शृणु राजन् स्थिरो भूत्वा तवैवापनयो महान्,संजयने कहा--राजन्! उस युद्धमें मानवशरीरोंका भारी संहार हुआ है। हाथी, घोड़े और रथोंका भी विनाश देखा गया है। वह सब आप स्थिर होकर सुनिये। यह आपके ही महान् अन्यायका फल है
قال سَنْجَيَا: «أيها الملك، لقد وقع في تلك الحرب فناءٌ عظيم لأجساد الرجال، ورُئي كذلك هلاك الفيلة والخيول والعربات. فاسمع ثابتَ الجَنان؛ فذلك ثمرةُ ظلمك العظيم أنت.»
संजय उवाच