भीष्मपर्व — अध्याय ६२: वासुदेवमहात्म्यप्रशंसा (देव–ब्रह्मसंवादः)
द्रोणभीष्मौ रणे यत्तौ धर्मराजस्य वाहिनीम् । नाशयेतां शरैस्तीक्ष्णगै: कड्कपत्रपरिच्छदै:,इसी प्रकार एक ओरसे आकर युद्धके लिये सदा उद्यत रहनेवाले द्रोणाचार्य और भीष्मने कंकपक्षीके पंखोंसे युक्त तीखे बाणोंद्वारा धर्मराज युधिष्ठिरकी सेनाका विनाश आरम्भ कर दिया
وكذلك أقبل درونا وبيشما من ناحيةٍ إلى ساحة القتال، وهما دائمًا على أهبة الحرب، وشرعا يُفنيان جيشَ دارماراجا يودهيشثيرا بسهامٍ حادّةٍ مُريَّشةٍ بريش طائر الكَنْكا.
संजय उवाच