Brahmā’s Instruction on Brahmacarya, Vānaprastha, and the Aliṅga Path
Ethics of Non-attachment
संस्कृत: सर्वसंस्कारैस्तथैव ब्रह्मचर्यवान् । ग्रामान्निष्क्रम्य चारण्ये मुनि: प्रत्रजितो वसेत्,वानप्रस्थ मुनिको सब प्रकारके संस्कारोंके द्वारा शुद्ध होकर ब्रह्मचर्यव्रतका पालन करते हुए घरकी ममता त्यागकर गाँवसे बाहर निकलकर वनमें निवास करना चाहिये
بعد أن يتطهّر بجميع طقوس التطهير، ويحفظ نذر البراهماتشاريا، ينبغي للناسِك على نهج «فانابراستا» أن يترك تعلّقه بالبيت، ويخرج من القرية، ويقيم في الغابة.
वायुदेव उवाच