अनागतं च न ध्यायेन्नातीतमनुचिन्तयेत् । वर्तमानमुपेक्षेत कालाकाड्क्षी समाहित:,संन्यासीको उचित है कि भविष्यके लिये विचार न करे, बीती हुई घटनाका चिन्तन न करे और वर्तमानकी भी उपेक्षा कर दे। केवल कालकी प्रतीक्षा करता हुआ चित्तवृत्तियोंका समाधान करता रहे
يليق بالمتنسّك ألا يتفكّر فيما لم يأتِ بعد، وألا يستغرق في تذكّر ما مضى؛ بل ليُعرض حتى عن الحاضر. وليكن منتظرًا جريان الزمان وحده، جامعًا قلبه، مُسكنًا خواطره.
वायुदेव उवाच