धृतराष्ट्राश्रमगमनम् — The Pandavas’ Procession to Dhritarashtra’s Hermitage
द्विधा कृत्वा$55त्मनो देहमादित्यं तपतां वरम् । लोकांश्ष तापयान वै विद्धि कर्ण च शोभने,शोभने! तपनेवालोंमें श्रेष्ठ सूर्ययेव अपने शरीरके दो भाग करके एकसे सम्पूर्ण लोकोंको ताप देते रहे और दूसरे भागसे कर्णके रूपमें अवतीर्ण हुए। इस तरह कर्णको तुम सूर्यरूप जानो
قال فياسا: «أيتها الحسناء، إن الشمس، وهي أسمى من يبعث الحرارة، قد شطرت جسدها شطرين: بشطرٍ ظلت تُسخّن العوالم كلها، وبالشطر الآخر هبطت في صورة كارنا. فاعلمي إذن أن كارنا ذو طبيعة شمسية.»
व्यास उवाच