Bhāgīrathī-tīra-śauca, Kurukṣetra-gamana, and Śatayūpa-āśrama-dīkṣā (गङ्गातीरशौच–कुरुक्षेत्रगमन–शतयूपाश्रमदीक्षा)
बलवन्तं तथा55त्मानं मेने बहुगुणं तदा । धर्मराजो महातेजास्तच्च सस्मार पाण्डव:,इसके विपरीत उन्होंने अपनेमें विशेष बल और अधिक गुणोंका अनुमान किया। प्रजानाथ! इसके बाद महातेजस्वी पाण्डुपुत्र विद्यावान् धर्मराज युधिष्ठिरने अपने समस्त पुरातन स्वरूपका स्मरण किया। (मैं और विदुरजी एक ही धर्मके अंशसे प्रकट हुए थे, इस बातका अनुभव किया)। इतना ही नहीं, उन महातेजस्वी नरेशने व्यासजीके बताये हुए योगधर्मका भी स्मरण कर लिया
balavantaṃ tathātmānaṃ mene bahuguṇaṃ tadā | dharmarājo mahātejās tac ca sasmāra pāṇḍavaḥ ||
ثم إنّ الباندڤيَّ الجبّار، ملكَ الدارما المتلألئ (يودهيشثيرا)، رأى في نفسه قوةً ووفرةً من الفضائل. وفي تلك اللحظة تذكّر طبيعته الأولى القديمة—وأدرك الحقيقة الباطنة أنّه وفيدورا قد تجلّيا من نصيبٍ واحدٍ من الدارما—كما تذكّر أيضًا رياضةَ اليوغا-دارما التي علّمها ڤياسا.
वैशम्पायन उवाच