Adhyāya 9: Pratiśruta-Dāna
The Duty to Fulfill Promised Gifts
भीष्म उवाच यो न दद्यात् प्रतिश्रुत्य स्वल्पं वा यदि वा बहु आशास्तस्य हता: सर्वा: क्लीबस्येव प्रजाफलम्,भीष्मजीने कहा--युथधिष्ठिर! जो थोड़ा या अधिक देनेकी प्रतिज्ञा करके उसे नहीं देता है, उसकी सभी आशाएँ वैसे ही नष्ट हो जाती हैं जैसे नपुंसककी संतानरूपी फलविषयक आशा
قال بهيشما: «يا يودهيشثيرا، من وعد بالعطاء—قليلًا كان أو كثيرًا—ثم لم يعطِ، انقطعت آماله كلها، كما تنقطع آمال العنين في ثمرة الذرية.»
भीष्म उवाच