त॑ भूक्त्वैव स तु क्षिप्रं ततो वचनमत्रवीत् । क्षिप्रमड्गानि लिम्पस्व पायसेनेति स सम ह,उसको थोड़ा-सा ही खाकर वे तुरंत मुझसे बोले--“कृष्ण! इस खीरको शीघ्र ही अपने सारे अंगोंमें पोत लो"
taṁ bhuktvaiva sa tu kṣipraṁ tato vacanam atravīt | kṣipram aṅgāni limpasva pāyasene ti sa sma ha ||
فلمّا أكل منه لقيماتٍ يسيرة، قال لي من فوره: «يا كِرِشنا، أسرِعْ فامسحْ هذا الباياسا على جميع أعضائك!»
वायुदेव उवाच