कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
श्वरपाकपुल्कसादीनां कुत्सितानामचेतसाम् | कुलेषु तेषु जायन्ते गुरुवृद्धापचायिन:,बहुत वर्षोके बाद जब वे उस नरकसे छुटकारा पाते हैं तो श्वपाक और पुल्कस आदि निन्दित और मूढ़ मनुष्योंके कुत्सित कुलमें जन्म लेते हैं। गुरुजनों और वृद्धोंका तिरस्कार करनेवाले वे अधम मानव चाण्डालोंके उन्हीं निन्दित कुलोंमें उत्पन्न होते हैं
śvapāka-pulkasa-ādīnāṁ kutsitānām acetāsām | kuleṣu teṣu jāyante guru-vṛddhāpacāyinaḥ ||
قال المهيشفرا: بعد أن يُطلَق سراح أولئك ذوي العقول الدنيئة من ذلك الجحيم، يولدون بين جماعاتٍ محتقرة مثل الشفاباكا والبولكاسا. إنهم أحطّ الناس—الذين لا يوقّرون الشيوخ والمعلمين—ولذلك يعودون فيولدون في تلك السلالات المذمومة.
श्रीमहेश्वर उवाच