कल्मषापहर-कीर्तनम् / Kīrtana for the Removal of Impurity
अर्घ्यहिन् न च सत्कारैरर्चयन्ति यथाविधि । अर्घ्यमाचमनीयं वा न यच्छन्त्यल्पबुद्धय:,इतना ही नहीं, वे अर्घ्य देनेयोग्य माननीय व्यक्तियोंका नाना प्रकारके सत्कारोंद्वारा विधिपूर्वक पूजन नहीं करते अथवा वे मूर्ख उन्हें अर््धय या आचमनीय नहीं देते हैं
وليس ذلك فحسب؛ فهؤلاء القليلو الفهم لا يكرّمون على الوجه المشروع من يستحق «الأرغْيَه» بما يليق من ضيافةٍ وتوقير، ولا يقدّمون له الأرغْيَه ولا ماء «الآچَمَنِيَّه» للتطهير.
श्रीमहेश्वर उवाच