कालयुक्तधर्मविवेकः
Discerning Dharma in Accord with Time
जब दूसरेका धन निर्जन वनमें पड़ा हुआ दिखायी दे, उस समय भी जो उसकी ओर मन ललचाकर किसीकी हिंसा नहीं करते, वे मनुष्य स्वर्गमें जाते हैं ।। ग्रामे गृहे वा ये द्रव्यं पारक्यं विजने स्थितम् । नाभिनन्दन्ति वै नित्यं ते नरा: स्वर्गगामिन:,गाँव या घरके एकान्त स्थानमें पड़े हुए पराये धनका जो कभी अभिनन्दन नहीं करते हैं, वे मानव स्वर्गगामी होते हैं
grāme gṛhe vā ye dravyaṃ pārakyaṃ vijane sthitam | nābhinandanti vai nityaṃ te narāḥ svargagāminaḥ ||
قال مهاديڤا: من رأى مالَ غيره ملقىً في موضعٍ خالٍ—في قريةٍ أو في بيت—فلا يلتذّ به في باطنه ولا يفرح بفكرة أخذه، ولا يرتكب لأجله عنفًا، فأولئك هم الذين يمضون إلى السماء.
श्रीमहेश्वर उवाच