उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
नानागुल्मलताकीर्ण मृगद्धिजनिषेवितम् | सिद्धचारणसंयुक्तं रम्यं पुष्पितकाननम्,नाना प्रकारकी लता-बेलें वहाँ छायी हुई हैं। मृग और पक्षी उस आश्रमका सेवन करते हैं। सिद्ध और चारण वहाँ सदा निवास करते हैं। उस रमणीय आश्रमके आस-पासका वन सुन्दर पुष्पोंसे सुशोभित है
كان ذلك المَنسَكُ بهيجًا، تكتنفه شجيراتٌ وكرومٌ من شتّى الأنواع، وتؤمه الوحوشُ والطيورُ. وكان السِّدْهَةُ والتشارَنةُ يقيمون فيه، والغابةُ المحيطةُ به متألّقةٌ بأزهارٍ متفتّحةٍ تزيده حُسنًا.
भीष्म उवाच