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Shloka 5

महाभिष-गङ्गा-दर्शनं वसूनां शापकथनं च

Mahābhiṣa Encounters Gaṅgā; The Vasus Explain Their Curse

तस्मादेतद्‌ वर्जनीयं नरेन्द्र दुष्ट लोके गर्हणीयं च कर्म । आखा्यात॑ ते पार्थिव सर्वमेव भूयश्वेदानीं वद कि ते वदामि,इसलिये नरेन्द्र! इस लोकमें जो दुष्ट और निन्दनीय कर्म हो उसको सर्वथा त्याग देना चाहिये। भूपाल! मैंने तुमसे सब कुछ कह दिया, बोलो, अब और तुम्हें क्या बताऊँ?

لذلك، أيها الملك بين الناس: إن كل فعلٍ خبيثٍ مذمومٍ في هذا العالم ينبغي أن يُترك تركًا تامًّا. يا سيد الأرض: لقد أخبرتك بكل شيء؛ فقل الآن، ماذا تريدني أن أزيدك بيانًا؟

अष्टक उवाच