ययातेर्वानप्रस्थतपःस्वर्गारोहणम् | Yayāti’s Vānaprastha Austerities and Ascent to Heaven
देवयान्युवाच राजायं नाहुषस्तात दुर्गमे पाणिमग्रहीत् । नमस्ते देहि मामस्मै लोके नान्यं पतिं वृणे,देवयानी बोली--तात! ये नहुषपुत्र राजा ययाति हैं। इन्होंने संकटके समय मेरा हाथ पकड़ा था। आपको नमस्कार है। आप मुझे इन्हींकी सेवामें समर्पित कर दें। मैं इस जगतमें इनके सिवा दूसरे किसी पतिका वरण नहीं करूँगी
devayāny uvāca rājāyaṃ nāhuṣas tāta durgame pāṇim agrahīt | namas te dehi mām asmai loke nānyaṃ patiṃ vṛṇe ||
قالت ديفاياني: «يا أبتِ الحبيب، هذا هو الملك يَياتي ابن نَهُوشا. في ساعة الخطر أمسك بيدي وأنقذني. أنحني لك—فزوّجني إياه. في هذا العالم لا أختار زوجًا غيره».
वैशम्पायन उवाच