अध्याय ७४: अक्रोध–क्षमा–निवासनीति
Chapter 74: Non-anger, Forbearance, and the Ethics of Residence
अश्रद्धेयमिदं वाक्यं कथयन्ती न लज्जसे । विशेषतो मत्सकाशे दुष्टतापसि गम्यताम्,तुम्हारी यह बात श्रद्धा करनेके योग्य नहीं है। इसे कहते समय तुम्हें लज्जा नहीं आती? विशेषतः मेरे समीप ऐसी बातें कहनेमें तुम्हें संकोच होना चाहिये। दुष्ट तपस्विनि! तुम चली जाओ यहाँसे
إن هذا القول الذي تقولينه غير جدير بالتصديق. أما تستحين وأنت تنطقين به؟ ولا سيما بين يديّ، كان ينبغي لك أن تتحرّجي. أيتها المتنسّكة الخبيثة! اذهبي من هنا.
दुष्यन्त उवाच