कच-देवयानी संवादः
Kaca–Devayānī Dialogue and the Curse on Vidyā
अभिवाद्य ततः सा त॑ प्राक्रीडदृषिसंनिधौ । अपोवाह च वासो<स्या मारुत: शशिसंनिभम्,उस समय महर्षिको प्रणाम करके वह अप्सरा उनके समीपवर्ती स्थानमें ही भाँति- भाँतिकी क्रीड़ाएँ करने लगी। इतनेमें ही वायुने मेनकाका चन्द्रमाके समान उज्ज्वल वस्त्र उसके शरीरसे हटा दिया
فحيّت الرِّشيَّ بانحناءةٍ ثم أخذت تلهو على مقربةٍ منه بألوانٍ من اللعب. وفي تلك اللحظة خطف ماروت، إله الريح، ثوبها اللامع كالقمر عن جسدها.
कण्व उवाच