कच-देवयानी संवादः
Kaca–Devayānī Dialogue and the Curse on Vidyā
उन्होंने मेनकाको अपने निकट आनेका निमन्त्रण दिया। अनिन्द्य सुन्दरी मेनका तो यह चाहती ही थी, उनसे सम्बन्ध स्थापित करनेके लिये वह राजी हो गयी। तदनन्तर वे दोनों वहाँ सुदीर्घध कालतक इच्छानुसार विहार तथा रमण करते रहे। वह महान् काल उन्हें एक दिनके समान प्रतीत हुआ। काम और क्रोधपर विजय न पा सकनेवाले उन सदा क्षमाशील महर्षिने दीर्घकालसे उपार्जित की हुई तपस्याको नष्ट कर दिया। तपस्याका क्षय होनेसे मुनिके मनपर मोह छा गया। तब मेनका काम तथा रागके वशीभूत हुए मुनिके पास गयी। ब्रह्मन! फिर मुनिने मेनकाके गर्भसे हिमालयके रमणीय शिखरपर मालिनी नदीके किनारे शकुन्तलाको जन्म दिया। मेनकाका काम पूरा हो चुका था; वह उस नवजात गर्भको मालिनीके तटपर छोड़कर तुरंत इन्द्र-लोकको चली गयी। सिंह और व्याप्रोंसे भरे हुए निर्जन वनमें उस शिशुको सोते देख शकुन्तों (पक्षियों)-ने उसे सब ओरसे पाँखोंद्वारा ढक लिया; जिससे कच्चे मांस खानेवाले गीध आदि जीव वनमें इस कन्याकी हिंसा न कर सकें ।। ८-- १२ || पर्यरक्षन्त तां तत्र शकुन्ता मेनकात्मजाम् | उपस्प्रष्ठं गतश्चाहमपश्यं शयितामिमाम्
paryarakṣanta tāṁ tatra śakuntā menakātmajām | upaspṛṣṭaṁ gataś cāham apaśyaṁ śayitām imām ||
هناك كانت الشَّكُنْتات (الطيور) تحرس ابنةَ ميناكا من كل جانب. وبعد أن أتممتُ اغتسالي التطهيري، جئتُ فرأيتُ هذا الرضيعَ مضطجعًا هناك. وتُظهر الحادثةُ أنّ العجز عن ضبط الزهد قد يفضي إلى الوهم؛ غير أنّ العناية والرحمة تظلّان تحميان البريئة، صونًا للنظام الأخلاقي، لكي تؤدّي المولودةُ الدورَ الذي قُدِّر لها.
कण्व उवाच
The passage contrasts human vulnerability—loss of tapas through desire and delusion—with the safeguarding power of compassion and cosmic order: even when an ascetic falters, the innocent child is protected and her destined place in dharma is preserved.
Kaṇva reports that birds guarded Menakā’s newborn daughter left in the forest; after completing his ablutions, he arrives and sees the infant lying there—setting up her rescue and the naming of the child as Śakuntalā.