Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
समां न च्यावयेत् स्थानात् त॑ वै गत्वा प्रलोभय । चर तस्य तपोविषध्नं कुरु मेडविधघ्नमुत्तमम्,“अतः ऐसा करो, जिससे वे मुझे अपने स्थानसे भ्रष्ट न कर सकें। तुम उनके पास जाकर उन्हें लुभाओ, उनकी तपस्यामें विघ्न डाल दो और इस प्रकार मेरे विघ्नके निवारणका उत्तम साधन प्रस्तुत करो
«فاصنعي إذن ما يمنعه من أن يزعزعني عن مقامي. اذهبي إليه وراوديه؛ شوّشي عليه تَبَسَه (نسكه)، وقدّمي خير وسيلة لدفع العائق عني.»
कण्व उवाच