Jaratkāru’s Conditional Marriage Vow and Vāsuki’s Offer (जरत्कारु-विवाह-नियमः)
त॑ दष्ट॑ पन्नगेन्द्रेण करिष्येडहमपज्वरम् । तत्र मे<र्थश्न धर्मश्न भवितेति विचिन्तयन्,अतः उन्होंने सोचा कि नागराजके डँसे हुए महाराजका विष उतारकर मैं उन्हें जीवित कर दूँगा। ऐसा करनेसे वहाँ मुझे धन तो मिलेगा ही, लोकोपकारी राजाको जिलानेसे धर्म भी होगा
ففكّر قائلاً: «ذلك الملك العظيم الذي لدغه سيّد الحيّات، سأستخرج سُمَّه وأعيده إلى الحياة. فإن فعلتُ نلتُ هناك مالاً، وبإحياء ملكٍ نافعٍ للناس أحرزُ أيضاً ثواب الدَّرْمَا».
गौरयुख उवाच