Jaratkāru-nirukti and Parīkṣit’s forest encounter (जরত्कारुनिरुक्तिः—परिक्षिद्वनप्रसङ्गः)
सौतिरुवाच तेषां तु भगवाउ्च्छेष: कद्रू त्यक्त्वा महायशा: । उग्र॑ तप: समातस्थे वायुभक्षो यतव्रत:,उग्रश्रवाजीने कहा--शौनक! उन नागोंमेंसे महा-यशस्वी भगवान् शेषनागने कद्रूका साथ छोड़कर कठोर तपस्या प्रारम्भ की। वे केवल वायु पीकर रहते और संयमपूर्वक व्रतका पालन करते थे
قال سوتي: من بين أولئك الناغا، إنَّ الإلهيَّ شِيشا (Śeṣa) ذا المجد العظيم ترك كَدْرُو (Kadrū) وابتدأ تقشّفًا شديدًا. كان يقتات بالهواء وحده، ويحفظ نذوره بضبطٍ صارمٍ للنفس.
शौनक उवाच