Vālakhilya-Tapas and the Birth of Garuḍa (वालखिल्यतपः-गरुडोत्पत्तिः)
मन:संहर्षजं दिव्यं गन्धर्वाप्ससां प्रियम् । मत्तभ्रमरसंघुष्टं मनोज्ञाकृतिदर्शनम्,वह दिव्य वन हृदयके हर्षको बढ़ानेवाला था। गन्धर्व और अप्सराएँ उसे अधिक पसंद करती थीं। मतवाले भ्रमर वहाँ सब ओर गूँज रहे थे। अपनी मनोहर छटाके द्वारा वह अत्यन्त दर्शनीय जान पड़ता था
وكانت تلك الغابة الإلهية تزيد القلب بهجةً. وكانت محبوبةً لدى الغندرفا والأبسارا. وكانت أسراب النحل، كأنها سكرى بالرحيق، تطنّ في كل ناحية. وبهيئتها الآسرة بدت شديدة الاستحقاق للنظر والتأمل.
पितामह उवाच