द्रोण उवाच हिरण्यरेतास्त्वरितो ज्वलन्नायाति न: क्षयम् । सप्तजिद्दानन: क्रूरो लेलिहानो विसर्पति,द्रोणने कहा--यह जाज्वल्यमान अग्नि हमारे घोंसलेकी ओर तीव्र वेगसे आ रहा है। इसके मुखमें सात जिह्वाएँ हैं और यह क्रूर अग्नि समस्त वृक्षोंको चाटता हुआ सब ओर फैल रहा है
قال دروṇa: «إن هيرانياريتاس—النار المتوهّجة—تندفع مسرعةً نحو عشّنا لتجلب لنا الهلاك. في فمها سبعة ألسنة، وهذه النار القاسية تلعق الأشجار كلّها وتنتشر في كلّ جهة».
द्रोण उवाच