Vyāsa’s Counsel to the Concealed Pāṇḍavas; Śaṃkara’s Boon and the Predestination of Draupadī
Chapter 157
पित्रा मात्रा च विहितां सदा गार्हस्थ्यभागिनीम् । वरयित्वा यथान्यायं मन्त्रवत् परिणीय च,तुम्हारे पिता-माताने तुम्हें सदाके लिये मेरे गृहस्थाश्रमकी अधिकारिणी बनाया है। मैंने विधिपूर्वक तुम्हारा वरण करके मन्त्रोच्चारणपूर्वक तुम्हारे साथ विवाह किया है
لقد جعل أبوكِ وأمّكِ منكِ شريكةً لي على الدوام في شؤون بيتنا ودارما ربّ الأسرة. وقد اخترتُكِ على الوجه المشروع، ثم تزوّجتُكِ وفق الطقس، مع تلاوة المانترا كما تقتضي السنّة.
ब्राह्मण उवाच