कर्णप्रवेशः—रङ्गे द्वन्द्वयुद्धप्रस्तावः तथा अङ्गराज्याभिषेकः
Karna’s Entry, Duel Proposal, and Consecration as King of Aṅga
तस्येमानात्मजान् देहं भारया च सुमहात्मन: । स्वराष्ट्र गृह गच्छामो धर्म एष हि नः स्मृतः,उनके इन पुत्रोंको, पाण्डु और माद्रीके शरीरोंकी अस्थियोंको तथा उन महात्मा नरेशकी महारानी कुन्तीको लेकर हमलोग उनकी राजधानीमें चलें। इस समय हमारे लिये यही धर्म प्रतीत होता है
«لنحمل هؤلاء الأبناء، ومعهم عظام جسدي باندو ومادري، ولنأخذ كذلك الملكة العظمى كونتي زوجة ذلك الملك الجليل، ثم نمضي إلى عاصمة مملكته؛ فهذا هو الدَّرْمَا الذي نراه لنا في هذه الساعة».
वैशम्पायन उवाच