Pāṇḍu’s Marriages, Conquests, and Triumphal Return (पाण्डोर्विवाह-विजय-प्रत्यागमनम्)
ततो मामाह स मुनिर्गर्भमुत्सूज्य मामकम् । द्वीपेडस्या एव सरित: कन्यैव त्वं भविष्यसि,“तदनन्तर मुनिने मुझसे कहा--'तुम इस यमुनाके ही द्वीपमें मेरे द्वारा स्थापित इस गर्भको त्यागकर फिर कन्या ही हो जाओगी”
tato mām āha sa munir garbham utsṛjya māmakam | dvīpe ’syā eva saritaḥ kanyā eva tvaṃ bhaviṣyasi ||
ثم قال لي الحكيم: «بعد أن تُسقِطي الجنينَ الذي حُبِلَ به منّي، على هذه الجزيرة نفسها في النهر، ستعودين عذراء كما كنتِ.»
वैशम्पायन उवाच