अनुक्रमणिकाध्यायः (Anukramaṇikā Adhyāya) — Invocation, Narrator Frame, and Textual Scope
यदाश्रौष॑ कर्णघटोत्कचाभ्यां युद्धे मुक्तां सूतपुत्रेण शक्तिम् । यया वध्य: समरे सव्यसाची तदा नाशंसे विजयाय संजय,जब मैंने सुना कि कर्ण और घटोत्कचके युद्धमें कर्णने वह शक्ति घटोत्कचपर चला दी, जिससे रणांगणमें अर्जुनका वध किया जा सकता था। संजय! तब मैंने विजयकी आशा छोड़ दी
حين سمعتُ أنه في قتال كَرْنَة وغَطُوتْكَچَا، أطلق كَرْنَة—ابن السائق—تلك «الشَّكْتِي» على غَطُوتْكَچَا، وهي التي كان يمكن بها قتل سَفْيَسَاتْشِي (أرجونا) في ساحة الوغى، عندئذٍ يا سَنْجَايَا تركتُ رجاء النصر.